Cloud computing

जैसे जैसे जमाना आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे रोज़ाना कोई न कोई नई technology का इजात हो रहा है। दुनिया से कदम से कदम मिला कर चलना है तो हमें इन technology के बारे में जानना आवश्यक होता है। अब पिछले कुछ समय से जो टेक्नोलॉजी सुनने में आ रही है वो है Cloud कंप्यूटिंग तो आखिर क्या है ये Cloud Computing और ये क्या करती है। अगर आपके मन में उठ रहे हैं ऐसे ही ढेरों सवाल तो हमारी इस पोस्ट Cloud computing किसे कहते हैं (Cloud Computing meaning in hindi) को पूरा पढ़िए इसमें हम इस टेक्नोलॉजी से जुड़े हर सवाल का जवाब बड़े विस्तार से देंगे।

 

Cloud Computing क्या होता है | what is Cloud Computing meaning in hindi

 

Cloud Computing वह टेक्नोलॉजी है जिसमे इंटरनेट का इस्तेमाल करके विभिन्न तरह की सेवाएं (services) प्रदान की जाती हैं। यह सेवाएं (services) कुछ भी हो सकती हैं फिर चाहे किसी प्रकार का सॉफ्टवेयर हो या सर्वर पर storage space दिया जाना हो या कोई अन्य सेवा हो। क्लाउड कंप्यूटिंग का मतलब है किसी भी तरह की कंप्यूटिंग सर्विस को इंटरनेट के जरिए यूजर की डिमांड पर प्रदान करना।
आसान भाषा में अगर Cloud Computing को समझाएं तो इस टेक्नोलॉजी में यूजर को इंटरनेट के एक सर्वर पर (जिसे क्लाउड कहा जाता है) डाटा स्टोरेज की फैसिलिटी प्रदान की जाती है। ऐसे में Cloud पर space खरीदकर यूजर अपना कितना भी डाटा उस पर save कर सकता है और अपने डाटा को फिर दुनिया में कहीं से भी access कर सकता है।

 

Cloud Computing के उदाहरण | Examples Of Cloud Computing

 

Cloud Computing टेक्नोलॉजी के अनेकों उदाहरण आज दुनिया में मौजूद हैं। जिसमे से कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध उदाहरण हम आपके सामने पेश करते हैं।

1. youtube : प्रसिद्ध वीडियो शेयरिंग प्लेटफार्म youtube पर रोज़ाना लाखों वीडियो अपलोड होते हैं। ऐसे में इतने सारे वीडियो को स्टोर करने के लिए यूट्यूब Cloud Computing टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।

2. facebook : फेसबुक जैसा प्रसिद्ध सोशल मीडिया प्लेटफार्म जिसपर अरबों लोगों की प्रोफाइल है और बहुत सा डाटा मौजूद है तो ऐसे में इतने सारे डाटा को रखने के लिए फेसबुक भी Cloud Computing का ही इस्तेमाल करता है।

3. Emails : email सेवा प्रदान करने वाली सारी कंपनी (जैसे की Gmail, Rediff, yahoo) व ऑनलाइन storage space देने वाली सारी कंपनियां जैसे की ड्रॉपबॉक्स, यांडेक्स, मीडिया फायर, मेगा आदि सभी कंपनियां Cloud Computing का ही इस्तेमाल करती हैं।

 

Cloud Computing का इतिहास | History Of Cloud Computing

 

Cloud Computing की शुरुआत 1960 के दशक की मानी जाती है। तब इंटरनेट की ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई थी। Cloud Computing की असल शुरुआत इसके 30 से 40 साल बाद 1990 में हुई जब Salesforce नाम की कंपनी ने अपनी वेबसाइट के लोगों को सेवाएं प्रदान करना शुरू किया। इसके बाद से लोगों ने इसके महत्त्व को समझना शुरू किया और इसके बाद ही पता चला की यह आने वाले समय में कितनी महत्वपूर्ण चीज साबित हो सकती है। इसके कई सालों बाद इस फील्ड ने तेजी पकड़ी और 21वी शताब्दी में आ करके आमज़ॉन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई दिग्गज कंपनियों ने Cloud Computing की फील्ड में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया।

 

Cloud Computing कैसे काम करता है | How Cloud Computing works

 

Cloud Computing में कई सारे सर्वर्स यानी कम्प्यूटर्स जिन पर एक विशेष सॉफ्टवेयर install रहता है उसे काम में लिया जाता है। ये एक से अधिक भी हो सकते हैं। इसके कई सारे सॉफ्टवेयर होते हैं। Cloud Computing मूलतः Dual layers technology पर काम करता है। जहाँ सर्वर्स को मैनेज करने के लिए एक अलग लेयर होती है जिसे back end कहते हैं और दूसरी लेयर जिसे क्लाइंट इस्तेमाल करते हैं इसे front end कहते हैं। इसी तरह back end और front end दोनों को मिलकर एक पूरा Cloud Computing के लिए सर्वर सेटअप होता है।

 

Cloud Computing के प्रकार | Types Of cloud computing

Cloud Computing को दो अलग-अलग तरीकों के आधार पर विभाजित किया गया है
(A). डिप्लॉयमेंट के आधार पर।
(B) क्लाउड के द्वारा प्रदान की जाने वाली सर्विस के आधार पर।

 

(A) डिप्लॉयमेंट के आधार पर Cloud Computing के निम्न प्रकार हैं।

1. पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग (Public Cloud Computing)

पब्लिक क्लाउड हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध रहता है और यह सर्विस प्रोवाइडर द्वारा मैनेज किया जाता है। पब्लिक क्लाउड सर्विसेज कई बार फ्री रहती हैं या इनके लिए बहुत ही कम चार्ज किया जाता है। अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट azure ये सभी पब्लिक Cloud Computing के उधारण है।

 

2. प्राइवेट क्लाउड कंप्यूटिंग (Private Cloud Computing)

प्राइवेट Cloud Computing में सर्विसेज और नेटवर्क एक प्राइवेट क्लाउड पर स्टोर किये जाते हैं। इसमें यूजर अपने को क्लाउड स्टोरेज को किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करना होता। जैसे की गूगल ड्राइव एक प्राइवेट Cloud Computing का उधारण है। यहाँ आपके सारा डाटा आपके ईमेल ईद और पासवर्ड से सुरक्षित होता है और इसमें आपका ड्राइव आपके अलावा कोई और नहीं उपयोग कर सकता।

 

3. कम्युनिटी क्लाउड कंप्यूटिंग (Community Cloud Computing)

कम्युनिटी Cloud Computing सिर्फ एक समूह के लोगों के लिए उपलब्ध रहती है। इसके अलावा कोई अन्य बाहरी इंसान इस डाटा को access नहीं कर सकता। जैसे की उधारण के रूप में किसी सरकारी दफ्तर के लिए सिर्फ उसके कर्मचारी ही उसकी साइट पर उपलब्ध डाटा का इस्तेमाल कर सकते हैं या किसी यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गयी वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री का उपयोह केवल उस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी ही कर सकते हैं।

 

4. हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग (Hybrid Cloud Computing)

hybrid Cloud में प्राइवेट क्लाउड और पब्लिक क्लाउड दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। किसी साइट पर कुछ सामग्री केवल रजिस्टर लोगों के लिए उपलब्ध हो और कुछ सामग्री सार्वजनिक उपलब्ध हो तो ऐसे क्लाउड को हाइब्रिड क्लाउड कहते हैं।

 

(B) Cloud के द्वारा प्रदान की जाने वाली सर्विस के आधार पर Cloud Computing के निम्न प्रकार हैं।

 

1. Iaas (Infrastructure as a service)

इस तरह की सर्विस में क्लाउड का कंप्यूटिंग पावर, स्टोरेज, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क पावर और बाकी सारा कण्ट्रोल यूजर के पास होता है। इस सर्विस को मूल रूप से बिज़नेस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण VPS यानी वर्चुअल प्राइवेट सर्वर है। जिसमे आपको सॉफ्टवेयर और नेटवर्क के साथ-साथ कंप्यूटिंग पावर भी मिलती है।

 

2. Paas (Platform as a service)

Paas(Platform as a service) में यूजर को सिर्फ एक प्लेटफार्म मिलता है। जिसमे या तो स्टोरेज या कंप्यूटिंग पावर हो सकती है इसमें आप चीजों को पूरी तरह कण्ट्रोल नहीं करते इन्हे क्लाउड प्रोवाइडर ही कण्ट्रोल कर सकते हैं इसके उधारण हैं जीमेल, रीडिफ़, याहू आदि।

 

3. Saas (Software as a service)

Saas (Software as a service) में आपको रिमोट सर्वर पर होस्टेड केवल एक सॉफ्टवेयर ही मिलता है जिसका इस्तेमाल किसी निश्चित काम के लिए किया जाता है। इस तरह की सर्विसेज को ज्यादातर छोटे बिज़नेस काम में लेते हैं। इस तरह की सर्विस में किसी भी तरह का सॉफ्टवेयर हो सकता है जैसे गूगल डॉक्स ऑनलाइन या गूगल गसुईट आदि ये सभी saas के उधारण हैं।

 

Cloud Computing के लाभ | Advantages Of Cloud Computing

 

1. ज्यादा स्टोरेज (Large storage)

इसमें आपका पूरा डाटा Cloud पर save होता है जिसमे आप अपनी मर्जी और जरुरत के अनुसार अपना स्टोरेज बड़ा सकते हैं।

2. डाटा एक्सेस करने में आसानी (Ease of Data Access)

Cloud पर डाटा स्टोर करने का सबसे बड़ा फायदा ये है की आप इसे कही से भी और किसी भी डिवाइस से access कर सकते हैं। जरुरत है तो सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन की जिसको इस्तेमाल करके आप अपने Cloud को access कर सकते हैं।

3. ज्यादा प्रोसेसिंग पावर (Large processing power)

Cloud Computing पर आपको processing पावर के साथ समझौता करने की कोई जरुरत नहीं है इसमें आप जितना चाहे उतना प्रोसेसिंग पावर खरीद सकते हैं।

4. कम कीमित (Less price)

Cloud Computing में आप अपनी जरुरत अनुसार storage space खरीद सकते हैं और आपको सिर्फ उतने के ही पैसे चुकाने होते हैं। जैसे की अगर आपको 20 GB स्टोरेज की जरुरत है तो आप 20 GB के पैसे चुका कर इतना ही स्पेस खरीद सकते हैं। इसके लिए आपको 500 GB हार्ड डिस्क नहीं खरीदनी पड़ेगी।

 

तो ये थी दोस्तों Cloud Computing से जुड़ी कुछ महत्पूर्ण जानकारी। हम आशा करते हैं की आपको Cloud computing किसे कहते हैं (what is Cloud computing meaning in hindi) समझ आ गया होगा। दोस्तों आपको ये जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसे ही खबरें पड़ते रहने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें व ऊपर दिए नोटिफिकेशन पर Allow का बटन दबा कर अन्य खबरों का लुफ्त उठाएं।

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