Bhukamp in hindi

Bhukamp information in hindi : प्रकर्ति मनुष्य को खुल कर सब कुछ देती हैं परन्तु कभी कभी विनाशकारी रूप भी ले लेती है। ये विनाशकारी रूप प्राकर्तिक आपदा आने के समय दिखाई पड़ता है। ये आपदाएं कुछ समय के लिए ही आती हैं। परन्तु ऐसी आपदाओं के कारण भारी मात्रा में जान-माल की हानि होती है।

यूं तो धरती पर कई प्राकर्तिक आपदाएं आती रहती हैं इन्ही में से एक है भूकंप। भूकंप वह आपदा है जो कभी भी कहीं भी आ सकता है। यह अगर अनर्थकारी रूप ले ले तो पृथ्वी पर प्रलय भी ला सकता है। अब ऐसे में सवाल ये उठता है की भूकंप है क्या (Bhukamp in hindi), ये कैसे आता है और इससे कैसे बचा जाए। अगर आप भी यही सब जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को ध्यान से पढ़िए क्युकी इसमें भूकंप से जुड़ी जानकारी (essay on earthquake in hindi) को बड़े विस्तार से बताया गया है।

 

भूकंप क्या है | Bhukamp kya hai | What is an Earthquake

भूकंप (Earthquake) भू पटल की कम्पन अथवा लहर है जो धरातल के नीचे अथवा ऊपर चट्टानों के लचीलेपन या गुरुत्वाकर्षण की समस्थिति में क्षणिक अव्यवस्था होने पर उत्पन्न होती है। आसान भाषा में बात करें तो भूकंप वह घटना है जिसके द्वारा भूपटल में हलचल पैदा होती है तथा कम्पन होता है। यह कम्पन तरंग के रूप में होता है जैसे-जैसे ये तरंगे केंद्र से दूर जाती हैं उतना उनकी शक्ति या तीव्रता का आभास होता है।

 

भूकंप आने के पहले के संकेत | Bhukamp information in hindi

भूकंप सम्बन्धी घटना का अध्ययन विज्ञान की जिस शाखा के अंतर्गत किया जाता है उसे भूकंप विज्ञान (Seismology) कहते हैं। भूकंप आने के पहले वायु मंडल में रेडॉन गैस की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। अतः इस गैस की मात्रा में वृद्धि होना उस प्रदेश में भूकंप आने का संकेत होता है। भूकंप के दौरान पृथ्वी में कई प्रकार की तरंगों की उत्पत्ति होती है और इन भूकम्पीय लहरों को सीस्मोग्राफ पर अंकन कर भूकंप की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है। भूकंप (Earthquake) के दौरान उत्पन्न भूकम्पीय लहरों को मुख्या रूप से तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है।

1. प्राथमिक या पी तरंगे (Primary waves or P waves)
2. अनुप्रस्थ या गौर तरंगे (Transverse or secondary waves)
3. धरातलीय तरंगे (Surface or long period waves)

 

भूकंप के कारण | Bhukamp ke karan | Causes of earthquake in hindi

भूकंप प्राकर्तिक व मानवीय दोनों कारणों से आ सकता है। जैसे की प्राकर्तिक कारणों में ज्वालामुखी किर्या, भू संतुलन से सम्बंधित समायोजन, प्लेटों की गतिशीलता, आंतरिक गैसों की मात्रा में वृद्धि, पृथ्वी का घूर्ण जलीय भार आदि की वजह से भूकंप (Earthquake) आ सकता है। वहीं मानवीय कारण जैसे की परमाणु परिक्षण, बांधों एवं विशाल जलाशयों का निर्माण, अस्थिर प्रदेशों में सड़कों का निर्माण आदि भूकंप आने के कारण हैं।

 

भूकंप के प्रभाव | Bhukamp ke prabhav | Effects of an earthquake

भूकंप का प्रभाव दो रूपों में होता है प्रथम प्रभाव उत्पत्ति केंद्र के चारों तरफ तरंगों के द्वारा प्रसारित होता है। दूसरा प्रभाव धरातलीय भागों में ऊपर तथा नीचे की तरफ लंबवत रूप से होता है। भूकंप का यह रूप अत्यंत विनाशकारी होता है।
जहाँ से भूकंप की शुरुआत होती है उस स्थान को भूकंप का केंद्र कहते हैं। भूकंप आने की स्थिति में सबसे पहले कम्पन का अनुभव यहीं पर होता है। भूकंप केंद्र से जो लहरें प्रसारित होती हैं उन्हें भूकंप लहरें कहते हैं।

 

भूकंप से होने वाली क्षति | Damages from Earthquake

भूकंप वह प्राकर्तिक आपदा है जो चाहे तो पृथ्वी पर प्रलय भी ला सकती है। अगर किसी क्षेत्र में भूकंप आता है तो वहां जान माल को भारी क्षति पहुँचती है। भूकंप से निम्न जन हानियाँ हो सकती हैं:

  • मनुष्य एवं जीव जन्तु की मृत्यु
  • जनस्वास्थ पर प्रभाव
  • भौतिक क्षति
  • परिवहन नेटवर्क में बाधा
  • बिजली और संचार सेवा में रूकावट

 

भूकंप मापने का यंत्र | Instrument to measure the Earthquake

जिस सवेदनशील यंत्र द्वारा भूकम्पीय तरंगों की तीव्रता मापी जाती है उन्हें सीस्मोमीटर (Seismometer) कहते हैं। सीस्मोमीटर पर सीस्मोग्राफ के द्वारा भूकंप को मापा जाता है इसके तीन स्केल होते हैं।

1. रोस्सी फोरेल स्केल (Rossi forel scale) : इसके मापक 1 से 11 तक होते हैं।
2. मरकेली स्केल (mercalli scale) : यह अनुभव प्रधान स्केल है जिसके 12 मापक होते हैं।
3. रिचटर स्केल (Richter scale) : यह गड़तीय मापक है जिसकी तीव्रता 0 से 9 तक होती है।

 

भूकंप के दुष्प्रभाव को कम करने के उपाय | Bhukamp ki jankari

भूकंप वह प्राकर्तिक आपदा है जो कभी भी कहीं भी आ सकती है। परन्तु फिर भी अगर कुछ बातें ध्यान में रखी जाए तो इसके दुष्प्राभव को कम किया जा सकता है जैसे कि :

  • भवन निर्माण से पहले मिट्टी की किस्म का विश्लेषण करा लेना चाहिए नरम मिट्टी के ऊपर मकान नहीं बनाने चाहिए।
  • भारतीय मानक ब्यूरो ने भूकंप की दृष्टि से सुरक्षित निर्माण कार्य के लिए भवन सहिंताएँ और मार्गदर्शन निर्देश प्रकाशित किये हैं। भवन का निर्माण करने से पूर्व नगर पालिका निर्धारित उपनियमों के अनुसार नक्शों की जांच करती हैं। ऐसे में हमें भी चाहिए की निर्माण से पहले सुनिश्चित कर लें की हमारे भवन के नक़्शे की जांच हुई हो।
  • सरकारी अधिकारियों, बिल्डरों, ठेकेदारों व अन्य लोगों को प्रक्षिशण द्वारा जागरूकता विकासित की जानी चाहिए व इससे बचने के उपाय बताए जाना चाहिए।

 

भूकंप से कैसे बचें | How to avoid earthquake

1. भूकंप के झटके महसूस होने पर अपने भवन से निकल कर किसी खुली जगह पर चले जाएँ।
2. भूकंप के समाय बिजली व गैस के कनेक्शन को हाथ ना लगाए बल्कि इसे बंद कर दें।
3. भूकंप के वक्त लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करें।
4. भूकंप के वक़्त अगर घर से नहीं निकल पाएं हैं तो ऐसे में दीवार के कोने से चिपक कर खड़े हो जाएँ।
5. भूकंप आने पर पेड़ व बिजली के खम्बे से दूर रहें।

 

तो दोस्तों ये थी भूकंप से जुडी कुछ जानकारी (bhukamp information in hindi), हम आशा करते हैं कि आपको भूकंप क्या है (bhukamp in hindi) व इससे जुड़ी जानकारी समझ आ गयी होगी। आपको ये जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसे ही जानकारियां पाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें व ऊपर दिए नोटिफिकेशन पर Allow का बटन दबा कर अन्य खबरों का लुफ्त उठाएं।

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